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मंगलवार, 24 जनवरी 2012

दिल्ली आल्यो

दिल्ली में अंग्रेजों का राज है । जनता की आवाज दिल्ली वाले सुनते नहीं हैं तो भगत सिंह क्या सोचता है भला :- 
गिनकै दिए बोल तीन सौ साठ दिल्ली आल्यो
 नहीं  सुनते बात हम देखें बाट दिल्ली आल्यो 
खत्म म्हारी पढ़ाई तम कटी गोलते कोन्या
मरते बिना दवाई तम कति सोचते कोन्या  
जुबाँ खोलते कोन्या होगे लाट दिल्ली आल्यो 
इसी निति अपनाई किसान यो बर्बाद करया
घर उजाड़ कई म्हारा अपना यो आबाद करया 
तमने फसाद करया तोल कै घाट दिल्ली आल्यो  
म्हारे बालक सरहद पै अपनी ज्यान खपावैं  
थारे घूमैं जहाजों मैं म्हारे खेत खान कमावैं 
भूख मैं टेम बितावैं थारे तो ठाठ दिल्ली आल्यो 
बांटे जात गोत पर खुल थारी पोल गयी रै
ये कच्ची चीज म्हारी बिका बिन मोल दई रै 
मचा रोल  दई रै गया बेरा पाट दिल्ली आल्यो 


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