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शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

मेरा कालजा धड कै रै

भगत  सिंह हिंदुस्तान के हालत देखकर क्या कहता है :-
हिंदुस्तान की हालत देख कै मेरा कालजा धड कै रै 
यो गोरयां का राज आंख मैं कुनक की ढालां रडकै रै 
भारत देश का यो किसान दुखी इसे गुलामी कर कै 
माणस का होवै अपमान दुखी इसे गुलामी कर कै 
मजदूर आज करै बखान दुखी इसे गुलामी कर कै 
लोग लुगाई हर इन्सान दुखी इसे गुलामी कर कै 
म्हारे खेत चार्ज गोरे दिन धोली खेत मैं बड़ कै रै ||
म्हारे देश की धरती पै हमनै नाज उगाया देखो 
म्हारे कारीगरों नै मलमल यो गजब बनाया देखो 
समाज पै घने टैक्स लगाये गोरयां नै सताया देखो 
लाठी गोली चलवाई हमपै घणा जुलम कमाया देखो 
देश तावला आजाद करावां ताहवां हाथ पकड़ कै रै ||
खान कई ढाल की म्हारी खनिज बहोत उपजावैं ये 
बारूं  मास नदी बहती रहैं फसल खूब लहलावैं  ये 
कारीगरों के सै हुनर निराले ताज महल बनावैं ये 
मजदूर बहा खून पस्सीना बड़े बड़े डैम चलावैं ये 
मिल कै स्त्री पुरुष सारे आजादी ल्यावां लड़ कै रै ||
आजादी और गुलामी का यो फरक समझ मैं आग्या 
शोषण कारी तंत्र गोरयां का कति लूट लूट कै खाग्या 
भारत वासी लेल्यो संभाला यो काला बादल छाग्या 
जलियाँ वाला कांड देख कै मेरा जी घणा दुःख पाग्या 
रणबीर बरोने आला ल्याया नया छंद घड कै रै || 

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