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भगत सिंह का आखिरी ख़त 22 मार्च ,1931 साथियों स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझ में भी होनी चाहिए , मैं इसे छिपाना नहीं चाहता । लेकिन म...
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लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------ देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी त...
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भगत सिंह एक बात के द्वारा इस संसार के बारे में क्या कहते हैं कौन किसे की गेल्याँ आया कौन किसे की गेल्याँ जावै रै कमेरे नै तो रोटी कोन्या ...
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भगत सिंह हिंदुस्तान के हालत देखकर क्या कहता है :- हिंदुस्तान की हालत देख कै मेरा कालजा धड कै रै यो गोरयां का राज आंख मैं कुनक की ढालां रड...
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भगत सिंह बता कित तै आया इतना विश्वास तेरे मैं उमर तेईस साल की देखी आजादी की प्यास तेरे मैं फिरंगी के जुल्मों तैं दुखी भारत के नर और नारी ...
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उस दौर में रूढीवाद का और स्वामियों का बहोत बोलबाला था । एक दिन भगत सिंह क्या सोचता है भला :- चारों और अँधेरा दिखे मानस हुया तंग फिरै अपने ...
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भगत सिंह एक ही जीवन में विश्वास रखता था । पिछले और अगले जन्म में उसका विश्वास नहीं था । बहुत ही कम उम्र में उसने बहुत सारे साहित्य और राजनी...
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