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शनिवार, 21 जनवरी 2012

भगत सिंह का पैगाम

भगत  सिंह  का  पैगाम 
सुखी जीवन हो म्हारा, भगत सिंह का पैगाम सुनो 
दुनिया के सब नर नारी, चुच्ची बच्चा तमाम सुनो 
सब पढ़े लिखे होज्याँ नहीं अनपढ़ टोह्या पावै फेर   
खान पीन की मौज हो ना भूख का भूत सतावै फेर 
बीर मर्द का हक़ हो बराबर बढ़िया रिवाज छावै फेर 
टोटा मानस की चौखट पै भूल कई बी ना आवै फेर 
सोच समझ कै चलांगे तो मुस्किल ना सै काम सुनो ।।
मिल कै सब करें मुकाबला हारी और बीमारी का  
बराबर के हक़ होज्याँ तै ना मान घटै फेर नारी का 
यो भाई चारा फेर बढैगा ना डर रहै चोरी जारी का    
सुख के साँस मैं साझा होज्या फेर जनता सारी का 
भ्रष्टाचार की कसी जावैगी पूरी तरियां लगाम सुनो ।।
आदर्श पंचायत बनावां  जो दुनिया मैं हो न्यारी फेर 
दन्त बिचालै आन्गली देकै या देखै दुनिया सारी फेर 
गाम स्तर पै बनी योजना लागू होज्यंगी म्हारी फेर 
गाम साझली धन धरती सबनै होज्यगी प्यारी फेर 
सुख का साँस इसा आवैगा ना बाजैं  फेर जाम   सुनो  ।। 
कोए अनहोनी बात नहीं ये सारी बात सें  होवन की 
बैठे होल्याँ भान और भाई घड़ी नहीं सै सोवन की 
नहीं लड़ा लडाई आपस मैं ताकत नहीं सै खोवन की 
बीज वर्ग संघर्ष का बोवां या समों सही सै बोवन की 
रणबीर सिंह यो भारत का गूंजै चौगार्दें नाम सुनो ।।



हट कै क्यूकर बुलाऊँ मैं

भगत सिंह एक ही जीवन में विश्वास रखता था । पिछले और अगले जन्म में उसका विश्वास नहीं था । बहुत ही कम उम्र में उसने बहुत सारे  साहित्य और राजनीति के विभिन्न पहलूआं का अध्यन कर लिया था । कवी क्या कहता है इस बारे में :-
हट कै  क्यूकर बुलाऊँ मैं ,पुनर्जनम नहीं गया बताया ।।
तेरे विचारां  पै चले हजारां ज्यां आजादी का दिन आया ।।
तेईस साल का था जिब तूं , फांसी का फंदा चूम गया 
इन्कलाब जिंदाबाद का नारा ,फिरंगी का सिर घूम गया  
पगड़ी संभाल जट्टा का गाना ,इंपै चुच्ची बच्चा झूम गया 
बम्ब गेरया असेम्बली मैं ,तूं मचा भारत मैं धूम गया  
समतावादी समाज बनावां , इसका विचार फैलाया ।।
 मार्क्स वाद  तैं लेकै प्रेरणा ,शोषण ख़त्म करना चाहया 
सबके हक़ बराबर होंगे ,यो इंकलाबी नारा फेर लाया  
यानी सी उम्र भगतसिंह की, गाँधी जी को समझाया  
गोरे जाकै ये काले आज्यांगे, सवाल उसनै यो ठाया 
क्रांतिकारी नौजवानों का ,यो संगठन मजबूत सुझाया ।।
ढाल ढाल के भारत वासी, सबकी भलाई चाही तनै 
यो सपना पूरा होज्या म्हारा,नौजवान सभा बनाई तनै  
अंध विश्वासी भारत मैं, लड़ी विचारों की लडाई तनै 
वर्ग संघर्ष सही रास्ता, जिस पै थी सीस चढ़ाई तनै 
तेरा रास्ता भूल गए ना,सब कै आजादी का फल थ्याया ।।
तेरे सपन्यां का वो भारत, भगत सिंह हम बनावांगे   
मशाल जो तनै जलाई वा,हम  घर घर ले ज्यावांगे 
थामनै फांसी खाई थी, हम ना पाछै कदम हटावांगे
जात पात गोत नात पर , नहीं  झूठा झगडा ठावांगे     
रणबीर सिंह बरोने आले नै दिल तैं यो छंद बनाया ।।