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भगत सिंह का आखिरी ख़त 22 मार्च ,1931 साथियों स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझ में भी होनी चाहिए , मैं इसे छिपाना नहीं चाहता । लेकिन म...
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लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------ देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी त...
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भगत सिंह एक बात के द्वारा इस संसार के बारे में क्या कहते हैं कौन किसे की गेल्याँ आया कौन किसे की गेल्याँ जावै रै कमेरे नै तो रोटी कोन्या ...
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भगत सिंह हिंदुस्तान के हालत देखकर क्या कहता है :- हिंदुस्तान की हालत देख कै मेरा कालजा धड कै रै यो गोरयां का राज आंख मैं कुनक की ढालां रड...
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भगत सिंह बता कित तै आया इतना विश्वास तेरे मैं उमर तेईस साल की देखी आजादी की प्यास तेरे मैं फिरंगी के जुल्मों तैं दुखी भारत के नर और नारी ...
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उस दौर में रूढीवाद का और स्वामियों का बहोत बोलबाला था । एक दिन भगत सिंह क्या सोचता है भला :- चारों और अँधेरा दिखे मानस हुया तंग फिरै अपने ...
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भगत सिंह एक ही जीवन में विश्वास रखता था । पिछले और अगले जन्म में उसका विश्वास नहीं था । बहुत ही कम उम्र में उसने बहुत सारे साहित्य और राजनी...
शनिवार, 4 फ़रवरी 2012
शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012
मेरा कालजा धड कै रै
भगत सिंह हिंदुस्तान के हालत देखकर क्या कहता है :-
हिंदुस्तान की हालत देख कै मेरा कालजा धड कै रै
यो गोरयां का राज आंख मैं कुनक की ढालां रडकै रै
भारत देश का यो किसान दुखी इसे गुलामी कर कै
माणस का होवै अपमान दुखी इसे गुलामी कर कै
मजदूर आज करै बखान दुखी इसे गुलामी कर कै
लोग लुगाई हर इन्सान दुखी इसे गुलामी कर कै
म्हारे खेत चार्ज गोरे दिन धोली खेत मैं बड़ कै रै ||
म्हारे देश की धरती पै हमनै नाज उगाया देखो
म्हारे कारीगरों नै मलमल यो गजब बनाया देखो
समाज पै घने टैक्स लगाये गोरयां नै सताया देखो
लाठी गोली चलवाई हमपै घणा जुलम कमाया देखो
देश तावला आजाद करावां ताहवां हाथ पकड़ कै रै ||
खान कई ढाल की म्हारी खनिज बहोत उपजावैं ये
बारूं मास नदी बहती रहैं फसल खूब लहलावैं ये
कारीगरों के सै हुनर निराले ताज महल बनावैं ये
मजदूर बहा खून पस्सीना बड़े बड़े डैम चलावैं ये
मिल कै स्त्री पुरुष सारे आजादी ल्यावां लड़ कै रै ||
आजादी और गुलामी का यो फरक समझ मैं आग्या
शोषण कारी तंत्र गोरयां का कति लूट लूट कै खाग्या
भारत वासी लेल्यो संभाला यो काला बादल छाग्या
जलियाँ वाला कांड देख कै मेरा जी घणा दुःख पाग्या
रणबीर बरोने आला ल्याया नया छंद घड कै रै ||
कित तै आया इतना विश्वास
भगत सिंह बता कित तै आया इतना विश्वास तेरे मैं
उमर तेईस साल की देखी आजादी की प्यास तेरे मैं
फिरंगी के जुल्मों तैं दुखी भारत के नर और नारी थे
फूट गेरो अर राज करो फिरंगी कसूते खिलारी थे
देश अपने मैं भिखारी थे पाया यो अहसास तेरे मैं ||
किताब पढ़न की आदत किताब पढी दुनिया भर की
विचार करकै पक्के तम्नै बजी लाई अपने सिर की
सुखदेव राजगुरु हर की मित्रता थी पास तेरे मैं ||
पूंजीवाद का खेल तम्नै पूरी तरियां समझ लिया रै
समाजवाद सै सही रास्ता इस्पे धार कदम दिया रै
इस ताहीं मरया अर जिया रै यो अंदाज खास तेरे मैं ||
पूंजीवाद पूरी दुनिया मैं हट कै कहर मचारया देख
समाजवाद का सपना तेरा रणबीर गीत बानारया देख
शहीदी दिवस मनारया देख आज बी करता आस तेरे मैं ||
कौन किसे की गेल्याँ आया
भगत सिंह एक बात के द्वारा इस संसार के बारे में क्या कहते हैं
कौन किसे की गेल्याँ आया कौन किसे की गेल्याँ जावै रै
कमेरे नै तो रोटी कोन्या यो लुटेरा घनी मौज उड़ावै रै
किस नै सै संसार बनाया किस नै रच्या समाज यो
म्हारा भाग तै भूख बताया सजै कामचोर कै ताज यो
मानवता का रुखाला क्यों पाई पाई का मोहताज यो
सरमायेदार क्यों लूट रहया मेहनतकश की लाज यो
क्यों ना समझां बात मोटी कून म्हारा भूत बनावै रै ||
कौन पहाड़ तौड़ कै करता धरती समतल मैदान ये
हल चला फसल उपजावै उसी का नाम किसान ये
कौन धरा नै चीर कै खोदै चांदी सोने की खान ये
ओहे क्यों कंगला घूम रहया चोर हुया धनवान ये
कर्मों का फल मिलता सबको नयों कह कै बहकावै रै ||
हम उठां अक जात पात का मिटा सकां कारोबार यो
हम उठां अक अनपढ़ता का मिटा सकां अंधकार यो
हम उठां अक जोर जुलम का मिटा सकां संसार यो
हम उठां अक उंच नीच का मिटा सकां व्योव्हार यो
जात पात और भाग भरोसै कोन्या पर बासावै रै ||
झुठ्याँ पै ना यकीन करो माहरी ताकत सै भरपूर
म्हारी छाती तै टकरा कै गोली होज्या चकनाचूर
जागते रहियो मत सोजाईयो म्हारी मंजिल नासै दूर
सिर्जन हारे हाथ म्हारे सें रणबीर घने अजब रनसूर
भगत सिंह आजादी खातर फांसी चूमी चाहवै रै ||
देख ले आकै सारा हाल
लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल
सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा
करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं
लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जम्कै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे
संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई
बदेशी कंपनी तेरे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर
भगत तनै जो बनाई तस्बीर देख जमा ए पाड़ बगाई
मंगलवार, 24 जनवरी 2012
RUDHIVAD
उस दौर में रूढीवाद का और स्वामियों का बहोत बोलबाला था । एक दिन भगत सिंह क्या सोचता है भला :-
चारों और अँधेरा दिखे मानस हुया तंग फिरै
अपने पै भरोसा नहीं रहया स्वामी सारे कै छाये
कष्ट निवारण खातर जनता स्वामियों संग फिरै
यो शरीर दुनिया मैं पदार्थ का विकसित रूप कहैं
जो प्रत्यक्ष बोध गेल्याँ ज्ञान अर्जन का ढंग करै।।
शरीर से बाहर आत्मा कदे रैह सकती कोण्या भाई
शरीर मैं हो चेतना पैदा चेतना नयी उमंग भरै ।।
दारू बनै जिन चीजों से उनमें नशे का गुण कहाँ
शरीर मैं चेतना पनपे फेर न्यारे न्यारे रंग भरै ।।
श्राद्ध पै दिया चढ़ावा कहवैं जावै सै इन्दर लोक मैं
अपने प्यारों को नहीं कदे श्राद्ध पंडित मलंग करै।।
पदार्थ से बनया सब पदार्थ बिन कुछ साकार नहीं
जीवन के संघर्ष मैं मानव कुदरत संग जंग करै ।।
दिल्ली आल्यो
दिल्ली में अंग्रेजों का राज है । जनता की आवाज दिल्ली वाले सुनते नहीं हैं तो भगत सिंह क्या सोचता है भला :-
गिनकै दिए बोल तीन सौ साठ दिल्ली आल्यो
नहीं सुनते बात हम देखें बाट दिल्ली आल्यो
खत्म म्हारी पढ़ाई तम कटी गोलते कोन्या
मरते बिना दवाई तम कति सोचते कोन्या
जुबाँ खोलते कोन्या होगे लाट दिल्ली आल्यो
इसी निति अपनाई किसान यो बर्बाद करया
घर उजाड़ कई म्हारा अपना यो आबाद करया
तमने फसाद करया तोल कै घाट दिल्ली आल्यो
म्हारे बालक सरहद पै अपनी ज्यान खपावैं
थारे घूमैं जहाजों मैं म्हारे खेत खान कमावैं
भूख मैं टेम बितावैं थारे तो ठाठ दिल्ली आल्यो
बांटे जात गोत पर खुल थारी पोल गयी रै
ये कच्ची चीज म्हारी बिका बिन मोल दई रै
मचा रोल दई रै गया बेरा पाट दिल्ली आल्यो
शनिवार, 21 जनवरी 2012
भगत सिंह का पैगाम
भगत सिंह का पैगाम
सुखी जीवन हो म्हारा, भगत सिंह का पैगाम सुनो
दुनिया के सब नर नारी, चुच्ची बच्चा तमाम सुनो
सब पढ़े लिखे होज्याँ नहीं अनपढ़ टोह्या पावै फेर
खान पीन की मौज हो ना भूख का भूत सतावै फेर
बीर मर्द का हक़ हो बराबर बढ़िया रिवाज छावै फेर
टोटा मानस की चौखट पै भूल कई बी ना आवै फेर
सोच समझ कै चलांगे तो मुस्किल ना सै काम सुनो ।।
मिल कै सब करें मुकाबला हारी और बीमारी का
मिल कै सब करें मुकाबला हारी और बीमारी का
बराबर के हक़ होज्याँ तै ना मान घटै फेर नारी का
यो भाई चारा फेर बढैगा ना डर रहै चोरी जारी का
सुख के साँस मैं साझा होज्या फेर जनता सारी का
भ्रष्टाचार की कसी जावैगी पूरी तरियां लगाम सुनो ।।
आदर्श पंचायत बनावां जो दुनिया मैं हो न्यारी फेर
आदर्श पंचायत बनावां जो दुनिया मैं हो न्यारी फेर
दन्त बिचालै आन्गली देकै या देखै दुनिया सारी फेर
गाम स्तर पै बनी योजना लागू होज्यंगी म्हारी फेर
गाम साझली धन धरती सबनै होज्यगी प्यारी फेर
सुख का साँस इसा आवैगा ना बाजैं फेर जाम सुनो ।।
कोए अनहोनी बात नहीं ये सारी बात सें होवन की
बैठे होल्याँ भान और भाई घड़ी नहीं सै सोवन की
नहीं लड़ा लडाई आपस मैं ताकत नहीं सै खोवन की
बीज वर्ग संघर्ष का बोवां या समों सही सै बोवन की
रणबीर सिंह यो भारत का गूंजै चौगार्दें नाम सुनो ।।
हट कै क्यूकर बुलाऊँ मैं
भगत सिंह एक ही जीवन में विश्वास रखता था । पिछले और अगले जन्म में उसका विश्वास नहीं था । बहुत ही कम उम्र में उसने बहुत सारे साहित्य और राजनीति के विभिन्न पहलूआं का अध्यन कर लिया था । कवी क्या कहता है इस बारे में :-
हट कै क्यूकर बुलाऊँ मैं ,पुनर्जनम नहीं गया बताया ।।
तेरे विचारां पै चले हजारां ज्यां आजादी का दिन आया ।।
तेईस साल का था जिब तूं , फांसी का फंदा चूम गया
इन्कलाब जिंदाबाद का नारा ,फिरंगी का सिर घूम गया
पगड़ी संभाल जट्टा का गाना ,इंपै चुच्ची बच्चा झूम गया
बम्ब गेरया असेम्बली मैं ,तूं मचा भारत मैं धूम गया
समतावादी समाज बनावां , इसका विचार फैलाया ।।
मार्क्स वाद तैं लेकै प्रेरणा ,शोषण ख़त्म करना चाहया
सबके हक़ बराबर होंगे ,यो इंकलाबी नारा फेर लाया
यानी सी उम्र भगतसिंह की, गाँधी जी को समझाया
गोरे जाकै ये काले आज्यांगे, सवाल उसनै यो ठाया
क्रांतिकारी नौजवानों का ,यो संगठन मजबूत सुझाया ।।
ढाल ढाल के भारत वासी, सबकी भलाई चाही तनै
यो सपना पूरा होज्या म्हारा,नौजवान सभा बनाई तनै
अंध विश्वासी भारत मैं, लड़ी विचारों की लडाई तनै
वर्ग संघर्ष सही रास्ता, जिस पै थी सीस चढ़ाई तनै
तेरा रास्ता भूल गए ना,सब कै आजादी का फल थ्याया ।।
तेरे सपन्यां का वो भारत, भगत सिंह हम बनावांगे
मशाल जो तनै जलाई वा,हम घर घर ले ज्यावांगे
थामनै फांसी खाई थी, हम ना पाछै कदम हटावांगे
जात पात गोत नात पर , नहीं झूठा झगडा ठावांगे
रणबीर सिंह बरोने आले नै दिल तैं यो छंद बनाया ।।
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